Be the jeweler of your own life, because you may not get this chance again
अपने जीवन के जौहरी स्वयं ही बने।
क्या पता फिर ये मौका मिले ना मिले।
कितनी नरकों में भटके फिरे थे जी हम।
जब ये तेरा अंश मिला, मारे फिरते थे हम।
देव बन भी गए तो तरसते थे हम।
एक बार तो मानव का मौका मिले।
अपने जीवन के जौहरी स्वयं ही बने।
क्या पता फिर यह मौका मिले ना मिले।
आत्मज्ञानी बने, धर्मदाता बने। खुद में देखे प्रभु और विधाता बने।
जैन दर्शन का हमको खजाना मिला। साधु संतों का हमको समागम मिला।
अब तो आत्मा का कल्याण पल पल करे।
अपने जीवन के जौहरी स्वयं ही बने।
क्या पता फिर ये मौका मिले ना मिले।
हम किसी के नहीं, कोई हमारा नहीं। तन भी अपना नहीं, कोई सहारा नहीं।
आत्मा है अकेली, अकेला सफर।
कर्म जैसे करोगे, वैसी डगर। समता भावों से जीवन सुहाना बने।
अपने जीवन के जौहरी स्वयं ही बने।
क्या पता फिर ये मौका मिले ना मिले।
पर पदार्थों से परिचय बहुत हो गया। जाग जाओ रे चेतन, समय हो गया।
मौका मिल ही गया है तो खोना नहीं। चार दिन का सफर है जी, सोना नहीं। कर्म शत्रु को जीते, महावीर बने।
अपने जीवन के जौहरी स्वयं ही बने।
क्या पता फिर ये मौका मिले ना मिले।
wonderful stavan from gurudev: https://www.youtube.com/watch?v=fZFOZrHLDn4&t=190s