Let go of your flaws, embrace virtue, and live with equanimity to make your life exemplary.
मैं रमण करूं, कुछ ऐसा काम करूं
प्रभुवर के नित गुण गाऊं, श्रद्धा से शीश नमाऊं
प्रभु आज्ञा में जीवन जीकर, परमातम सम बन जाऊं
स्वार्थ छोड़ू, निस्वार्थ बनूं, परमार्थ की राह धरूं
दुर्गुण को तजूं, सद्गुण को वरूं, समभाव में रमण करूं, कुछ ऐसा काम करूं,
आदर्श बने जीवन मेरा, कुछ ऐसा काम करूं,
दुर्गुण को तजूं, सद्गुण को वरूं, समभाव में रमण करूं, कुछ ऐसा काम करूं
मरुधर में हो या मधुबन, अनुशासन में मन होवे
पर धन, नारी ना लुभाए, मन अपना वश ना खोवे
व्यसनों से बचूं, वसनों को तजूं, पापों से बचूं
समता रस पान करूं
दुर्गुण को तजूं, सद्गुण को वरूं, समभाव में रमण करूं, कुछ ऐसा काम करूं,
आदर्श बने जीवन मेरा, कुछ ऐसा काम करूं,
दुर्गुण को तजूं, सद्गुण को वरूं, समभाव में रमण करूं
कुछ ऐसा काम करूं, आदर्श बने जीवन मेरा
ना रखूं अपेक्षा किसी से, पर काम सभी के आऊं
श्रम, सेवा, स्वावलंबन से, निज जीवन को मैं सजाऊं
आलस्य तजूं, श्रमशील बनूं, निज पुण्य भंडार भरूं
दुर्गुण को तजूं, सद्गुण को वरूं, समभाव में रमण करूं, कुछ ऐसा काम करूं,
आदर्श बने जीवन मेरा, कुछ ऐसा काम करूं,
दुर्गुण को तजूं, सद्गुण को वरूं, समभाव में रमण करूं
कुछ ऐसा काम करूं, आदर्श बने जीवन मेरा
आतम की गहराई में, निशदिन मैं गोते लगाऊं
सुख, शांति और आनंद के, मोती वहां से पाऊं
गुरु महेंद्र कहे, स्वविवेक जगे, निज में विश्राम करूं
दुर्गुण को तजूं, सद्गुण को वरूं, समभाव में रमण करूं, कुछ ऐसा काम करूं,
आदर्श बने जीवन मेरा, कुछ ऐसा काम करूं,
दुर्गुण को तजूं, सद्गुण को वरूं, समभाव में रमण करूं
कुछ ऐसा काम करूं